एक प्रयास ---------

- सर एडमंड हिलेरी और शेरपा तेनज़िंग नोर्गे कीये तस्वीर 28 मई, 1953 की है.यानि चोटी पर पहुंचने से एक दिन पहले की.ये दोनों ख़ासे किस्मत वाले भी रहे.क्योंकि महज दो दिन पहले ही एक दूसरी टीम एवरेस्ट कीचोटी से महज सौ मीटर की दूरी तक पहुंच चुकी थी,लेकिन उन्हें ऑक्सीज़न सिस्टम केनाकाम होने की वजह से वहीं से लौटना पड़ा था.
- 1953 में एवरेस्ट की चोटी पर चढ़ने वाले दल के साथ सामानढोने और रास्ता बताने वाले सैकड़ोंशेरपाओं को दल भी शामिल था.पीछे की पंक्ति में( बाएं से दाएं) खड़े हैंस्टुबार्ट, डावा तेनज़िंग, इवांस, वेली,हिलेरी, हंट, तेनज़िंग, लोवे, वार्ड,बुर्डिलन, बैंड, पॉग, ग्रेगरी, नोयास. बाएं से बैठे हुए हैं -टोपकी, थंडुप, अंग नामाज्ञ्याल,आंग तेनज़िंग, डावा थंडुप, पीम्बा,पासंग डावा, पहू दोर्ज़े, आंग ताम्बा,और आंग नायमा. इस तस्वीर मेंकई लोग शामिल नहीं है. जिनमेंअन्नूलू, दा नामज्ञ्याल, गोंपू और वेस्टमैकट).
एवरेस्ट फतह
ReplyDeleteबहुत अच्छा अरुणा जी
ब्लॉग का नाम "मुझे कुछ कहा है.... अच्छा लगा
pdf file editor जिससे पीडीऍफ़ फाइल को एडिट करें
शुक्रिया sanny chauhanजी ......माफ़ कीजिये ...'मुझे कुछ कहना है'
Deleteबहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
ReplyDeleteआपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा आज बृहस्पतिवार(30-05-2013) हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं ( चर्चा - 1260 ) में "मयंक का कोना" पर भी है!
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
सादर आभार मयंक जी ........क्षमा करें आज -कल समय नहीं दे पा रही हूँ व्यस्तता के चलते
Deleteसमय पर उपस्थित नहीं रह पाती
इस पोस्ट द्वारा कई अनजानी जानकारियां भी आज पहली बार मालूम पडी, बहुत आभार.
ReplyDeleteरामराम.
राम -राम ताऊ आभारी तो में हूँ आपकी ,जो हर पोस्ट पर अपने अमूल्य विचार देते हैं और हौसला बढाते हैं
Deleteबहुत ही अच्छी प्रस्तुति ...
ReplyDeleteआभार
आभार आपका बस यूँही हौसला बढाते रहिये
Deletethanks for detailed knowledge.
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