Friday, 8 November 2013

चार दिन

एक प्रयास ---------चुनाव आयोग ने राहुल को चार दिन का समय दिया 

चालीस साल में सोच नहीं पाए कब मुह खोले और क्या बोले ...????
अब चार दिन में क्या होगा ............

नेहरू ने

नेहरू ने सरदार पटेल को कहा था सांप्रदायिक : आडवाणी

ओहो ...अब समझ आया दूसरों को साम्प्रदायिक कहने का सिलसिला भी विरासत में मिला है कोंग्रेस को ........

--सरदार पटेल

एक प्रयास ---------सरदार पटेल आज होते तो नरेंद्र मोदी से बहुत निराश होते : ---राजमोहन गांधी

.........और लोकतंत्र में राजवंश देख कर तो गदगद हो जाते

वीजा नीति

एक प्रयास ---------वीजा नीति में बदलाव नहीं, पर मोदी कर सकते हैं आवेदन : -----अमेरिका
.............क्यों ??
कहाँ गयी दादा गिरी ????
अब डर लग रहा है क्या कहीं २०१४ के बाद भारत प्रवेश पर प्रतिबन्ध ना लग जाए

Sunday, 3 November 2013

भारत की मंगल कामनाएं हमेशा हैं इस मिशन के साथ ........

एक प्रयास ---------

भारत के मंगल मिशन के लिए उल्टी गिनती शुरू--------------
'तारों के संग चन्दा बैठा , हंस -हंस मुझे चिढाता है
रोज़ बुलाता हूँ में उसको ,अपनी अकड़ दिखाता है
एक बड़े राकेट पर चढ़ा कर, चन्द्र लोक पर जाउंगा 
छाती पर चन्दा की चढ़ा कर ,मंगल का पता लगाउंगा
खोज करूंगा मंगल ,तारा राष्ट्र ध्वजा फहराऊंगा..........
ऊँची करके राष्ट्र पताका, भारत का मान बढाउंगा...........'

ये कविता है सत्तर के दशक की
चम्पक में पढ़ी थी कभी ये कविता ,
जब हमने पढ़ी इसमें एक सन्देश , एक स्वपन होने के बावजूद
हमारे लिए इसका कोई मतलब नहीं था .............

लेकिन आज .....!!!!.

समय है इसके साकार होने का .........
चंदा के सर पर तो कब से सवार हो गए आज समय है मंगल तारे की खोज का--------


मंगल की ये यात्रा मंगलमय हो .........शुभ हो और सफल हो ......
भारत की मंगल कामनाएं हमेशा हैं इस मिशन के साथ .....................

Saturday, 2 November 2013

एक संस्मरण

एक प्रयास ----


आज जब दीवाली नज़दीक आ गयी है तो  मुझे बचपन की एक घटना 

याद आ रही है

कई दिन पहले से पटाखे शुरू कर देते थे बड़ा उत्साह रहता था

धनतेरस पर बाज़ार जाना और खूब खरीदारी करना | पूजा का सामान तो

 माता पिता के लिए होता था , हमें तो झालर , कंदील या सजावट का

 सामान भाता था ...पटाखे  भी खूब लुभाते थे

नरक चौदष को विशेष सफाई अभियान चलता था और और शाम को

 पिता नरकासुर का पुतला जलाने के लिए हमारे साथ खड़े होते ..जो 


गली में ही सब बच्चों के शोर गुल के बीच जलता था


जिसे बनाने के लिए पिता का पूरा सहयोग रहता ......खूब हल्ला -गुल्ला 

मचाते दशहरे का आनंद उठाते सब बच्चे |....एक बार नरक चतुर्दर्शी  

को सफाई में लगे थे तो मेरा मौसेरा भाई जो वहीँ रहता था ...कुछ पटाखे

 हाथ  में लिए चला आया ...मैंने बीच में ही अपना काम रोका और उसके

 साथ बाहर आ गयी ....पटाखे ज़रूर चलाते थे पर कभी भी डिब्बा आदि

 उस पर नहीं रखते थे. सुतली वाले बम ३ या ४ रहे होंगे ..कुछ जमा 

नहीं मामला .........मैंने उस को पैसे दिए कहा वो थोड़े बम खरीद लाये

उसने शर्त रखी कि अगर डिब्बा ऊपर रखने दिया जाएगा तो ही लाकर 

 देगा ...जिसे मैंने मान लिया ....वो सुतली बम लाया ....हम फिर से

 बाहर आ गए और भी कई बच्चे आ कर देखने लगे .....डिब्बा तो नहीं

मिला .....एक टूटा हुआ कप रखा था ...मैंने  वही दे दिया...और सब

 बच्चो को हटाने लगी ....वो तो सब बच गए ....कप के टुकड़े जो उछले

 ...तो एक टुकडा मेरी गर्दन में आकर लगा ....एक सेकिंड के लिए

 ....सन्नाटा और अन्धेरा मुझे कुछ समझ नहीं आया 

अचानक कुछ दर्द अनुभव हुआ ...देखा गले पर कप का टुकडा झटके  

से लगा था और खून बह रहा था 


तुरंत डाक्टर के पास लेजाया गया


आठ टाँके लगे .....और डाक्टर साहब बोले ..गले के .बीच में नहीं लगा 


वरना अभी हैप्पी दीवाली हो जाती 


आज भी उस दीवाली कि देंन मेरी गरदन पर है 

बीस दिन तक बिस्तर पर ही रहना पड़ा........दीवाली का मज़ा भी मेरा 

ही नहीं सब का किरकिरा हो गया .......भाई भी अपराधी महसूस कर


 रहा था.......उस के बाद से कम और सावधानी से चलाते रहे

अब तो बड़े हो गए हैं ...मगर हमारे बच्चे हमारी जगह आ गए हैं .......

ये घटना आज याद आ गयी ....मेरा  आप सबके लिए सुझाव है 

.......जितने भी पटाखे चलायें ...सावधानी से......और...बच्चों किसी  

बड़े की अगुआई में ही चलाना.

और आप बड़े लोग भी ....बच्चों को अकेला ना छोड़े.

अगर बिलकुल ना चलायें तो बहुत ही अच्छा है


पर बच्चों के लिए शगुन होना ज़रूरी है 


लेकिन कम और सुरक्षित पटाखे चलायें


दीवाली का त्यौहार आप सब के लिए शुभ हो सुरक्षित हो 


.............शुभकामनाओं के साथ 


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