Thursday, 6 May 2021

जय श्री राम

भारत एक अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र झेल रहा है
और लक्ष्य मोदी नही
हिन्दू , हिंदुत्व, सनातन है
सालों पहले भी जब कायर अलेक्जेंडर (काहे का महान, लुटेरा था 😏😏 ) निकला था तब भी भारत की समृद्धि, विकास
और प्रतिभा उनके आंखों में खटकती थी
भारत का दुर्भाग्य रहा एकता का अभाव 😥😥 जो तब भी था और आज भी है
विद्रोही विदेशियों के लिए पलक-पाँवड़े बिछाए तब भी बैठे थे
आज भी बैठे हैं
४७ में अगर देश सही हाथों में आ जाता तो  लगभग ७४  साल में हमारी पीढ़ी उल्टा-सीधा इतिहास पढ़ कर बड़ी न होती
भारतीय संस्कृति से जुड़ी रहती
देश भक्ति का पाठ पढ़ाना न पड़ता
आयुर्वेद और योग होता तो आज भारत तो कम से कम न जूझता इस सब से
लेकिन दो जिन्ना आये और दो पाकिस्तान बने
भारतीय जिन्ना का और पाकिस्तानी जिन्ना का 😥😥

आज चीन, पाक,के साथ खाली दिमाग वाले और मिल गए हैं, जिन्हें खालिस्तान चाहिए
एक अकेला मोदी शत्रु से तो कर ले सामना
जयचंदों से कैसे निबटे जो अंदर बैठे जड़ें हिला रहे हैं
धर्म परिवर्तन, गला काट राजनीति, झूठ को सच बनाना
विदेशी टुकड़े चबा-चबा कर यही कर रहे हैं
भारत विश्व गुरु बना तो सबकी जड़ें हिल जाएंगी
इस लिए ये वार हम पर है, हिन्दू पर है

एकता से ही सब सम्भव है
हमारे लिए परीक्षा की घड़ी और अस्तित्व की लड़ाई है जिसे मोदीजी के साथ जीतना ही होगा

जय श्री राम 🙏🏼🙏🏼

Wednesday, 9 September 2020

#शिक्षक दिवस

सर्वपल्ली राधा कृष्णन जी के जन्म दिवस पर कोटि-कोटि नमन 🙏🙏
शिक्षा जीवन भर चलती है ,माता-पिता ,घर के अन्य बड़े ,स्कूल के अध्यापक ,समय,अनुभव हमें हर पल इन सबसे कुछ न कुछ सीखने को मिलता रहता है :) 
सभी हमारे शिक्षक हैं
चेहरे बदल जाते हैं लेकिन गुरु और शिष्य अपने क्षेत्र में जमे रहते हैं 🤗
पग-पग पर समय-समय पर अनेक शिक्षकों का मार्ग दर्शन ही यहाँ तक ले आया । 
कई लोगों का स्थान अति विशिष्ट बन जाता है वो हमेशा स्मरण रहते हैं परन्तु किसी के भी योगदान को कम  नहीं आंक सकते  
घर, प्राइमरी स्कूल से लेकर कॉलेज तक की यात्रा रोचक रही , ज्ञानवर्द्धक रही बहुत स्मरणीय रही । 
अनेक लोगों का सहयोग मिला  
आज नही जानती कौन कहाँ हैं, कैसे हैं  ?
लेकिन अपने सभी शिक्षकों की ,गुरुजनों की,
माता-पिता की अपने प्रत्येक मार्ग-दर्शक की हृदय से आभारी हूँ , कृतज्ञ हूँ ❤️❤️❤️❤️
समस्त गुरुजन को करबद्ध नमन 🙏🙏🙏🙏 
सीखने के पल का कोई अंत नही 😊 परन्तु औपचारिक शिक्षा का समापन हो ही जाता है😊😊
नीचे प्रथम और अंतिम औपचारिक शिक्षा संस्थान  
🤗🤗
अंतिम औपचारिक शिक्षा संस्थान

प्रथम औपचारिक शिक्षा संस्थान

Saturday, 5 September 2020

नमन

आज मदन लाल जी की पुन्य तिथि पर एक प्रसंग याद आ गया --
है मेरे व्यक्तिगत जीवन का जो मदन लाल जैसे महान क्रांतिकारी से जुड़ा है .......

17 अगस्त 1909 को विदेशी धरती पर फांसी पर चढ़ाए जाने के बाद भी मदन लाल ढींगरा की राज्य व भारत सरकार ने कोई सुध नहीं ली ..............

उनके पार्थिव शरीर को भारत में किसी के द्वारा ना मांगे जाने के कारण उनके शरीर को जेल में ही दफना दिया ..............

जहाँ कुछ समय के बाद शहीद उधम सिंह को भी फाँसी के उपरांत दफना दिया गया ...........................

लेकिन ना जाने क्यों और कैसे उनकी शहादत की याद 1976 में सरकार को आ ही गयी तब ब्रिटिश सरकार से बात--चीत के बाद दोनों क्रांतिकारियों के अंतिम अवशेष भारत में लाए गए...........................

उन दिनों हम रूडकी में रहते थे ... ............और रूडकी तब उत्तर प्रदेश में था ..........

.....तब ,आज के बहुचर्चित 'नारायण दत्त तिवारी 'उत्तर प्रदेश के 'मुख्य मंत्री' थे ...........मदन लाल ढींगरा की अस्थियाँ भारत आई और उन्हें विसर्जन के लिए सड़क मार्ग से हरिद्वार ले जाया जा रहा था ......

मेरे पिताजी हमें ,उस महान आत्मा की विसर्जन हेतु जाती अस्थियों के दर्शन के लिए ले गए थे ...........
...साथ में छोटी बहन Garima Saxena भी थी ..

.अस्थि कलश खुली जीप या ट्रक में रखे थे ....
और अघोषित कर्फ्यू जैसा वातावरण था ............एक दम शान्ति ........
हज़ारों की संख्या में लोग सड़क के दोनों और जमा थे ...
अपने महान क्रांतिकारी को माल्यार्पण कर श्रधांजलि दे रहे थे .......... 

........तब इस बात के गौरव को ,इसके महत्व को समझ नहीं सकी थी .. लेकिन आज वो याद ताज़ा हो गयी ....और अब में उस एतिहासिक लम्हे का साक्षी बनने के लिए बहुत ही गर्व अनुभव करती हूँ ..............
मुझे अवसर मिला उस महान व्यक्ति की अस्थियों को प्रणाम करने का .......उस वीर को शत-शत नमन .......कर बध प्रणाम ....जय हिंद ..
...............................वन्दे मातरम ..........

Sunday, 16 August 2020

नमन

आज मदन लाल जी की पुन्य तिथि पर एक प्रसंग याद आ गया --
है मेरे व्यक्तिगत जीवन का जो मदन लाल जैसे महान क्रांतिकारी से जुड़ा है .......

17 अगस्त 1909 को विदेशी धरती पर फांसी पर चढ़ाए जाने के बाद भी मदन लाल ढींगरा की राज्य व भारत सरकार ने कोई सुध नहीं ली ..............

उनके पार्थिव शरीर को भारत में किसी के द्वारा ना मांगे जाने के कारण उनके शरीर को जेल में ही दफना दिया ..............

जहाँ कुछ समय के बाद शहीद उधम सिंह को भी फाँसी के उपरांत दफना दिया गया ...........................

लेकिन ना जाने क्यों और कैसे उनकी शहादत की याद 1976 में सरकार को आ ही गयी तब ब्रिटिश सरकार से बात--चीत के बाद दोनों क्रांतिकारियों के अंतिम अवशेष भारत में लाए गए...........................

उन दिनों हम रूडकी में रहते थे ... ............और रूडकी तब उत्तर प्रदेश में था ..........

.....तब ,आज के बहुचर्चित 'नारायण दत्त तिवारी 'उत्तर प्रदेश के 'मुख्य मंत्री' थे ...........मदन लाल ढींगरा की अस्थियाँ भारत आई और उन्हें विसर्जन के लिए सड़क मार्ग से हरिद्वार ले जाया जा रहा था ......

मेरे पिताजी हमें ,उस महान आत्मा की विसर्जन हेतु जाती अस्थियों के दर्शन के लिए ले गए थे ...........
...साथ में छोटी बहन Garima Saxena भी थी ..

.अस्थि कलश खुली जीप या ट्रक में रखे थे ....
और अघोषित कर्फ्यू जैसा वातावरण था ............एक दम शान्ति ........
हज़ारों की संख्या में लोग सड़क के दोनों और जमा थे ...
अपने महान क्रांतिकारी को माल्यार्पण कर श्रधांजलि दे रहे थे .......... 

........तब इस बात के गौरव को ,इसके महत्व को समझ नहीं सकी थी .. लेकिन आज वो याद ताज़ा हो गयी ....और अब में उस एतिहासिक लम्हे का साक्षी बनने के लिए बहुत ही गर्व अनुभव करती हूँ ..............
मुझे अवसर मिला उस महान व्यक्ति की अस्थियों को प्रणाम करने का .......उस वीर को शत-शत नमन .......कर बध प्रणाम ....जय हिंद ..
...............................वन्दे मातरम ..........

Friday, 26 January 2018








देश के समस्त चीन्हे-अनचीन्हे बलदानियों को ६८ वर्षीय गणतंत्र का सादर नमन 🙏
राष्ट्र आपका कृतज्ञ है🙏🙏

Saturday, 16 December 2017

जब भारतीय मेजर ने ख़ुद अपना पैर काटा-----१९७१ के साहसी जनरल

एक प्रयास ---------


जब भारतीय मेजर ने ख़ुद अपना पैर काटा------------
१९ ७१ युद्ध

मेजर कार्डोज़ो ने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण सिलहट की लड़ाई में भाग लिया था.
उनको हेलिकॉप्टर से चारों ओर चल रही गोलियों के बीच युद्धस्थल पर उतारा गया था.
पाकिस्तानी सेना के आत्मसमर्पण के बाद जब वो उस इलाक़े में गश्त लगा रहे थे,
तो उनका पैर एक बारूदी सुरंग पर पड़ा.....
आगे की कहानी ख़ुद बता रहे हैं

उस समय मैं वेलिंगटन स्टॉफ़ कॉलेज में कोर्स कर रहा था. हमें हुक्म मिला कि आप अपने घर-परिवार को छोड़कर सीधे पलटन में पहुँचिए.
जब मैं दिल्ली पहुँचा, तो पता चला कि लड़ाई शुरू हो गई है. पालम पहुँचे, तो पता चला कि विमान कैंसिल हो गए हैं, इसलिए मुझे भागकर नई दिल्ली स्टेशन पहुँचना पड़ा.
यहाँ पहुँचे तो पता चला कि असम मेल निकल गई है. दौड़कर गाड़ी की चेनपुलिंग करके हम ट्रेन में बैठे. असम पहुँचकर हमें पता चला कि सिलहट पर क़ब्ज़े की लड़ाई चल रही है.
हम धर्मनगर पहुँचे और जीप में बैठकर एक जगह खलौरा पहुँचे. वहाँ हम हेलिकॉप्टर के इंतज़ार में थे. हम देख रहे थे कि कई हेलिकॉप्टर में बड़ी संख्या में भारतीय जवान घायल होकर पहुँच रहे थे.
हम हेलिकॉप्टर से जब वहाँ पहुँचें, तो देखा कि भारी गोलाबारी चल रही थी. मोर्टार से, तोपखाने से गोले दाग़े जा रहे थे. वहाँ भयंकर लड़ाई चल रही थी. काफ़ी जवान घायल हो रहे थे और मारे जा रहे थे. साथ ही हम अपने दुश्मन को भी नुक़सान पहुँचा रहे थे.
मैं बारूदी सुरंग में फँस गया और मेरा एक पैर उड़ गया.
मेरे साथी मुझे उठाकर पलटन में ले आए.
मॉरफ़िन और कोई दर्द निवारक दवा नहीं मिली.
मैंने अपने गुरखा साथी से बोला कि खुखरी लाकर पैर काट लो, लेकिन वो इसके लिए तैयार नहीं हुआ.
फिर मैंने खुखरी मांगकर ख़ुद अपना पैर काट लिया.
उस कटे पैर को वहीं गड़वा दिया.
सीओ साहब ने बोला कि पाकिस्तान का एक युद्धबंदी सर्जन है,
मैंने उसे हुक्म दिया है कि वो ऑपरेशन करे.
 मैंने कहा कि मैं भारतीय अस्पताल में जाना चाहता हूँ लेकिन पता चला कि कोई हेलिकॉप्टर नहीं है.
फिर मैं तैयार हुआ.
मेजर मोहम्मद बशीर ने मेरा ऑपरेशन किया.
उन्होंने बहुत अच्छा ऑपरेशन किया.
मैं उसे धन्यवाद नहीं दे पाया. बीबीसी के माध्यम से उन्हें मालूम होगा कि मैं उनका आभारी हूँ.
मैं उन्हें धन्यवाद देना चाहता हूँ.
आज अपने नकली पैर के साथ आत्मविश्वास से भरे हैं मेजर जनरल 

Thursday, 17 August 2017

शत -शत नमन

एक प्रयास ---------आज मदन लाल जी की पुन्य तिथि पर एक प्रसंग याद आ गया --
है मेरे व्यक्तिगत जीवन का जो मदन लाल जैसे महान क्रांतिकारी से जुड़ा है .......
17 अगस्त 1909 को विदेशी धरती  पर फांसी पर चढ़ाए जाने के बाद भी मदन लाल ढींगरा जी की राज्य व भारत सरकार ने कोई सुध नहीं ली ......
उनके पार्थिव शरीर को भारत में किसी के द्वारा ना मांगे जाने के कारण उनके शरीर को जेल में ही दफना दिया ..............
जहाँ कुछ समय के बाद शहीद उधम सिंह को भी फाँसी के उपरांत दफना दिया गया ...........................
लेकिन ना जाने क्यों और कैसे उनकी शहादत की याद 1976 में सरकार को आ ही गयी तब ब्रिटिश सरकार से बात--चीत के बाद दोनों क्रांतिकारियों के अंतिम अवशेष भारत में लाए गए...........................
उन दिनों हम रूडकी में रहते थे और रूडकी तब उत्तर प्रदेश में था ..........
तब ,आज के बहुचर्चित 'नारायण दत्त तिवारी 'उत्तर प्रदेश के 'मुख्य मंत्री' थे
मदन लाल ढींगरा जी की अस्थियाँ भारत आई और उन्हें विसर्जन के लिए सड़क मार्ग से हरिद्वार ले जाया जा रहा था 
मेरे पिताजी हमें ,उस महान आत्मा की विसर्जन हेतु जाती अस्थियों के दर्शन के लिए ले गए थे ...........
...साथ में छोटी बहन Garima Saxena भी थी
अस्थि कलश खुली जीप या ट्रक में रखे थे
और अघोषित कर्फ्यू जैसा वातावरण था ............
एक दम शान्ति ........
हज़ारों की संख्या में लोग सड़क के दोनों और जमा थे ...
अपने महान क्रांतिकारी को माल्यार्पण कर श्रधांजलि दे रहे थे ..........
तब इस बात के गौरव को ,इसके महत्व को समझ नहीं सकी थी .. लेकिन आज वो याद ताज़ा हो गयी ....और अब में उस एतिहासिक लम्हे का साक्षी बनने के लिए बहुत ही गर्व अनुभव करती हूँ ..............
मुझे अवसर मिला उस महान व्यक्ति की अस्थियों को प्रणाम करने का .......
उस वीर को शत-शत नमन ,करबद्ध  प्रणाम ....जय हिंद,
वन्दे मातरम .........