Thursday, 15 May 2014

ज़ायके के ज़रिए अमन का पैग़ाम

एक प्रयास -----
  • सरहद रेस्त्रां
    भारत और पाकिस्तान सीमा से सिर्फ़ 1.5 किलोमीटर की दूरी पर है '
  • सरहद' रेस्टोरेंट जो 'इस पार' और 'उस पार' की साझा पंजाबी 
  • तहज़ीब की जीती जागती धरोहर के रूप में खड़ा है. 
  • सरहद रेस्त्रां
    कमाल की बात यह है कि 
  • 'सरहद' रेस्टोरेंट अमृतसर से 28 किलोमीटर की दूरी पर है 
  • जबकि ये लाहौर से ज़्यादा क़रीब है. 
  • लाहौर से सरहद रेस्टोरेंट की दूरी 22 किलोमीटर है.
  • सरहद रेस्त्रां
    इस रेस्टोरेंट की ख़ास बात ये है कि 
  • इसका नक्शा और वास्तुकला पाकिस्तान के
  •  पंजाब प्रांत के लाहौर की जामा मस्जिद जैसी है, 
  • जबकि इसके फ़र्श में जिन टाइलों का इस्तेमाल किया गया है 
  • वो अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में इस्तेमाल की गईं टाइलों जैसी है.
  • सरहद रेस्त्रां
    साज सज्जा में एक और ख़ास बात है. 
  • यहां बावर्चीखाने की दीवारों पर पकिस्तान की 'ट्रक हस्तकला' का इस्तेमाल किया गया है. 
  • लाहौर के रहने वाले नामी कलाकार हैदर अली ने ख़ुद यहां आकर इन्हें बनाया है.
  • सरहद रेस्त्रां
    'सरहद' रेस्टोरेंट के मालिक अमन जसपाल का कहना है कि 
  • उनका उद्देश्य दोनों तरफ़ की पंजाबियत को प्रोत्साहित करना है.
  • सरहद रेस्त्रां
    विभाजन से पहले पूरा पंजाब एक हुआ करता था. 
  • और 'सरहद' में विभाजन के पहले के अख़बार भी लगाए गए हैं
  •  जिससे अविभाजित भारत के इस इलाक़े के बारे में महत्वपूर्ण ख़बरें पढ़ने को मिलती हैं.
  • सरहद रेस्त्रां
    इस रेस्टोरेंट में बनने वाले व्यंजन भी बिलकुल अलग हैं. 
  • यहां पर 'लाहोरिया' व्यंजन या फिर पकिस्तान के
  •  पंजाब के व्यंजन काफ़ी लोकप्रिय हैं. 
  • इन व्यंजनों में इस्तेमाल होने वाले मसाले भी लाहौर से ही मंगाए जाते हैं.
  • सरहद रेस्त्रां
    'सरहद' रेस्टोरेंट, दोनों तरफ़ के पंजाब के पारंपरिक
  •  पकवानों का एक ऐसा ठिकाना बन गया है 
  • जहां अब दूर दूर से लोग आने लगे हैं.
  • सरहद रेस्त्रां
    खाने के अलावा पाकिस्तानी फ़ैशन
  •  डिजाइनरों के तैयार किए गए कपड़ों को भी यहाँ रखा गया है.
  • सरहद रेस्त्रां
    रेस्टोरेंट के मालिक अमन का कहना कि सरहद रेस्टोरेंट को 
  • वो सिर्फ़ एक ढाबा नहीं बल्कि 'अमन का एक संग्रहालय' बनाना चाहते हैं.
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1 comment:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज शुक्रवार (16-05-2014) को "मित्र वही जो बने सहायक"(चर्चा मंच-1614) में अद्यतन लिंक पर भी है!
    --
    मातृदिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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