Saturday, 1 November 2014

'शोभना सम्मान २०१३'

एक प्रयास ---------श्री प्रेमजनमेजयजी एवम् श्रीमती शोभना जी द्वारा गौरवांवित--
श्री प्रेमजनमेजयजी एवम् श्रीमती शोभना जी द्वारा गौरवांवित----  

मित्रों कल ३०-१०-१३ को गांधी शान्ति परिसर दिल्ली में 'शोभना सम्मान २०१३' संपन्न हुआ |
एक शानदार आयोजन था |
साहित्य संसार के बड़े-बड़े दिग्गज़,कई वरिष्ठ साहित्यकार,कई पत्रों के सम्पादक महोदय ,लेखक महोदय , ब्लॉग की दुनिया के कई महारथी थे , आभासी संसार के बहुत से मित्रोँ से मिलने का सुख़द अनुभव हुआ 
हर क्षेत्र के महारथी उपस्थित थे | 
भिन्न -भिन्न प्रान्त से बहुत से मित्रगण आये ,
लगा जैसे गांन्धी शान्ति परिसर में भारत के विभिन्न प्रान्त समा गये । 
एक सुखद अनुभव था
सुमित प्रताप जी अपने परिचित हलके -फुल्के अंदाज़ में तडका लगाते नज़र आये 
स्कूल-कालेज़ में कई बार उत्साह वर्धन हुआ लेकिन सार्वजानिक रूप से कई क्षेत्रोँ के दिग्गजों के साथ यूँ खडा होना पहला अनुभव रहा और इसका श्रेय सुमित भाई की संस्था को देना चाहूंगी
जिन्होंने सम्मानित कर  उत्साह बढाया |
कभी सोचा नहीं था जीवन में ऐसा भी अवसर आयेगा 
लेकिन ईश्वर की कृपा के साथ माता-पिता का आशीर्वाद :)
वो इस दुनिया में नहीं पर उनका आशीर्वाद हमेशा साथ है 
जलपान से प्रारंम्भ हुआ कार्यक्रम कई पड़ाव पार कर रात्री भोज के साथ सम्पन्न हुआ 
हर पड़ाव बेहद विशेष रहा |
शोभना संस्थान के लिए मेरी अशेष शुभकामनाएं हैं ये संस्था 
यूँही अपने लक्ष्य की और बढती रहे ,नयी-नयी प्रतिभाओं को आगे लाती रहें 
आपका हर कार्यक्रम सफल रहे |
आप को और आपकी संस्था को मेरी ढेरों शुभकामनाएं सुमित भाई .................

मित्रों कल ३०-१०-१३ को गांधी शान्ति परिसर दिल्ली में 'शोभना सम्मान २०१३' संपन्न हुआ |
एक शानदार आयोजन था |
साहित्य संसार के बड़े-बड़े दिग्गज़,कई वरिष्ठ साहित्यकार,कई पत्रों के सम्पादक महोदय ,लेखक महोदय , 
ब्लॉग की दुनिया के कई महारथी थे , आभासी संसार के बहुत से मित्रोँ से मिलने का सुख़द अनुभव हुआ 
हर क्षेत्र के महारथी उपस्थित थे |
श्री प्रेम जनमेयजी---










भिन्न -भिन्न प्रान्त से बहुत से मित्रगण आये ,
लगा जैसे गांन्धी शान्ति परिसर में भारत के विभिन्न प्रान्त समा गये ।
एक सुखद अनुभव था
श्री ज्योति खरे जी और श्री मती रेनू जी ----
श्री मती शोभना जी और सरिता भाटिया जी ----
सुमित प्रताप जी अपने परिचित हलके -फुल्के अंदाज़ में तडका लगाते नज़र आये 










स्कूल-कालेज़ में कई बार उत्साह वर्धन हुआ लेकिन सार्वजानिक रूप से कई क्षेत्रोँ के दिग्गजों के साथ यूँ खडा होना पहला अनुभव रहा और इसका श्रेय सुमित भाई की संस्था को देना चाहूंगी
जिन्होंने सम्मानित कर उत्साह बढाया |

कभी सोचा नहीं था जीवन में ऐसा भी अवसर आयेगा
लेकिन ईश्वर की कृपा के साथ माता-पिता का आशीर्वाद 
वो इस दुनिया में नहीं पर उनका आशीर्वाद हमेशा साथ है 



श्री ललित जी के साथ ---

जलपान से प्रारंम्भ हुआ कार्यक्रम कई पड़ाव पार कर रात्री भोज के साथ सम्पन्न हुआ
हर पड़ाव बेहद विशेष रहा |
समूह चित्र ---------











शोभना संस्थान के लिए मेरी अशेष शुभकामनाएं हैं ये संस्था
यूँही अपने लक्ष्य की और बढती रहे ,


अंजू जी और सुमित प्रताप सिंह

नयी-नयी प्रतिभाओं को आगे लाती रहें
आपका हर कार्यक्रम सफल रहे |

आप को और आपकी संस्था को मेरी ढेरों शुभकामनाएं सुमित भाई ..............

Sunday, 5 October 2014

उनके लिए इस जगह से बेहतर कोई जगह हो नहीं सकती

एक प्रयास ---------
आज इंडिया टीवी पर एक रिपोर्ट देख रही थी -
दिल्ली के आस-पास पाकिस्तान से आये हिन्दू शरणार्थी बसे हैं
ऐसी बदहाली में रह रहे हैं कि मत पूछिए लेकिन फिर भी खुश है !!!
सोचिये मेहनत कर एक समय खाते हैं तो दूसरे समय का ठिकाना नहीं,
कोई बुनियादी सुविधा नहीं है उनके पास ,
चूल्हा तक ढंग का नहीं बस एक जगह आंच जलाई और रोटी बना ली
लेकिन खुश है कि ये हमारा अपना देश है |
अपने बेहतर जीवन का सपना आँखों में बसाए पल -पल जीवन की जंग लड़ रहे हैं
एक तरह की मानसिक संतुष्टि है , आज़ादी है और यहाँ से जाना नहीं चाहते .....|
भारत सरकार को कोई सकारात्मक कदम उठाना चाहिए इन शरणार्थियों के लिए
विभाजन के समय पिछली पीढ़ी सही निर्णय नहीं ले पायी
जिसका भुगतान आज की पीढ़ी कर रही है .......
सब देश भारत नहीं होते जहाँ शरणार्थी हो या मेहमान सबका अपना महत्व है ......
सबके सम्मान की रक्षा सर्वोपरि है ........
मानवता के नाते हमारे देश में बांग्ला देश , अफगानिस्तान से असंख्य शरणार्थी शरण लिए हुए हैं जिनके पास इस देश के नागरिक ना होते हुए भी हर महतवपूर्ण प्रमाण पत्र मिलेगा ......
जैसे राशन कार्ड , आधार कार्ड ,वोटर पहचान पत्र ,वो इस देश के शरणार्थी हैं पर पिछले रास्ते से गहरी पैठ बना चुके हैं और आज शायद वो हमें शरणार्थी साबित कर दें| ...........
पूर्वी दिल्ली की सीमापुरी पर बांग्ला देशी काबिज़ हैं ..
कच्चे -पक्के मकानों और झुग्गियों में आपको 21 वी सदी की विलासिता का पूरा संसार मिलेगा लेकिन गंदगी का वो अम्बार है कि आप यहाँ से निकल नहीं सकते नाक दबाये बिना |
लेकिन एक छोटा बांग्ला देश सरपरस्तों के साए में बसा है |
ऐसे ही यमुना विहार के सी -१२ ब्लोंक के महंगे-महंगे मकान खरीद अफगानी अपनी कालोनी बसा चुके हैं ..............
अब हमारा देश तो ना जाने कितने ही देश के शरणार्थियों को स्थायी निवासी बना चुका है तो इन शरणार्थियों के बारें में भी विचार करे
वैसे भी ये तो अगर सही समय पर आजाते तो आज नागरिक होते यहाँ के ...........
अगर वहां खुश होते तो शायद आते भी नहीं लेकिन मुसीबत के मारे भागे हैं वहां से ,
तो सरकार को सोचना चाहिए एक आम आदमी के नाते मेरी अपील है सरकार से कि कोई उचित निर्णय ले उनके पक्ष में और राहत दे उन मुसीबत के मारों को .....वैसे भी उनके लिए इस जगह से बेहतर कोई जगह हो नहीं सकती
............

Saturday, 4 October 2014

मन की बात

एक प्रयास ---------


आज विविध भारती का जन्म दिन है 3 अक्टूबर 1957 ।
आज मोदीजी भी रेडियो की राह चले तो मुझे भी अपनी कुछ यादेँ साझा करने का मन हुआ।
मैने बहुत दिन से नही सुना लेकिन एक समय था कि विविध भारती के बिना दिन पूरा नही होता था । 
नई फ़िल्मोँ के 15-20 मिनट के प्रोग्राम ,गाने और सैनिक भाइयोँ का 'जयमाला' ।
एक स्टेशन पर हर शुक्रवार नाटक सुनना ।
'अच्छा चुनमुन अब हम चले' शाम पाँच बजे एक सुरीली आवाज़ !
बहुत अच्छी यादे ताज़ा हो आयीँ आज मोदीजी के संबोधन से । '
बहुत अच्छा कदम है जो मोदीजी न शुरू किया ........जन -जन तक पहुँचने के लिए
विविध भारती' को मेरी शुभकामनायेँ और बधाई ।
प्रसारण ऐसे ही होता रहे  लोग भाव-विभोर होते रहेँ 
अपनी यादों का संग्रह बढाते रहें .....


Thursday, 2 October 2014

और ३२ साल बाद ये सुनहरा गोल

एक प्रयास ---------

और ३२ साल बाद ये सुनहरा गोल
  
जीत गया भारत एक और स्वर्ण! बधाई पूरी हाकी टीम को 
बधाई हर भारत वासी को 
समय सही हो तो सब अच्छा होता है
लग रहा है हर क्षेत्र में भारत का खोया गौरव लौट रहा है .......
भारत ने फ़ाइनल में पाकिस्तान को पेनल्टी शूटआउट में 4-2 से राया. 
इसी के साथ भारत 2016 रियो ओलंपिक खेलों की अग्नि परीक्षा पास कर योग्य साबित हुआ और ओलिम्पिक में सीधा प्रवेश पा गया कर गया है...
चिर परिचित प्रतिद्वंदी के साथ जीत का स्वाद और बढ़ जाता है
भारतीय जीत के हीरो रहे गोलकीपर श्रीजेश रविंद्रन.

भारत ने पिछली बार 1998 में एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीता था.
तब भी निर्धारित समय व ओवरटाइम के बाद में दोनों टीमों 
(भारत और दक्षिण कोरिया) 
का स्कोर 1-1 से ही बराबरी पर रहा था और पेनल्टी शूटआउट से निकला नतीजा भी 
वही 4-2 का स्कोर था जिससे भारतीय टीम इस बार जीती है।

इससे पहले दोनों टीमें (भारत और पकिस्तान) हॉकी के फ़ाइनल में दिल्ली में एशियाई खेलों में आमने-सामने थीं. 
वो मैच भारतीय हॉकी को निराशा दे गया था 
दिल्ली के शिवाजी स्टेडियम में पाकिस्तान ने भारत को सात-एक गोल से परास्त किया था.
लेकिन आज सब हिसाब करते हुए भारत ने विजय पायी 

समय सही हो तो सब अच्छा होता है 
लग रहा है हर क्षेत्र में भारत का खोया गौरव लौट रहा है ...........

बधाई भारत की महिला हाकी टीम को भी खाली हाथ तो नहीं लौट रही
उसने भी जापान को परास्त कर कांस्य जीता ...




एक बार फिर से सबको बधाई ....:)
वन्दे मातरम

Saturday, 27 September 2014

अमेरिका यात्रा

 एक प्रयास ---------


पी एम यान न्यूयार्क मेँ 
 भारत 'मंगलमय' और अमेरिका 'नमोमय':)

Thursday, 25 September 2014

24 सितम्बर २०१४ भारत के लिए सुनहरा दिन -ऐसा रहा मार्स ऑर्बिटर मिशन का 300 दिन का सफर

एक प्रयास ---------
24 सितम्बर २०१४ भारत के लिए सुनहरा दिन बन गया एक अनोखा इतिहास लिख डाला हमारे वैज्ञानिकों ने -----
सभी वैज्ञानिक बने बधाई के पात्र उन्ही के प्रयासों से भारत के इतिहास में आज का दिन 
'स्वर्णाक्षरों' में लिखा गया , एक अनोखा इतिहास लिखा गया सभी वैज्ञानिकों को इस अभियान से जुड़े हर व्यक्ति को दिल से बधाई उन्होंने विश्व में भारत का नाम उंचा किया 

















भारत ने आज अपने मार्स ऑर्बिटर मिशन (एमओएम) को लाल ग्रह की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया। 

इस उपलब्धि तक पहुंचने में यान को 300 दिन का समय लगा। 


 मंगलयान के 300 दिन तक के सफर में हुई घटनाओं का घटनाक्रम 

5 नवंबर 2013: ---


इसरो के पीएसएलवी सी 25 ने आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा से भारत के मार्स ऑर्बिटर मिशन का प्रक्षेपण किया।

 7 नवंबर: पहली पृथ्वी-नियंत्रित प्रक्रिया संपन्न।
 8 नवंबर: दूसरी पृथ्वी-नियंत्रित प्रक्रिया संपन्न।
 9 नवंबर: तीसरी पृथ्वी-नियंत्रित प्रक्रिया संपन्न।
 11 नवंबर: चौथी पृथ्वी-नियंत्रित प्रक्रिया संपन्न।
 12 नवंबर: पांचवी पृथ्वी-नियंत्रित प्रक्रिया संपन्न।
 16 नवंबर: छठी पृथ्वी-नियंत्रित प्रक्रिया संपन्न। 

 
 1 दिसंबर:

एमओएम ने छोड़ी पृथ्वी की कक्षा,
 मंगल की ओर रवाना (ट्रांस मार्स इंजेक्शन)

 4 दिसंबर

एमओएम 9.25 लाख किलोमीटर के दायरे वाले पृथ्वी के गुरूत्वाकर्षण प्रभाव क्षेत्र से बाहर निकला।
 
 11 दिसंबर: 

अंतरिक्षयान पर पहली दिशा संशोधन प्रक्रिया संपन्न।
 
 11 जून 2014

दूसरी दिशा संशोधन प्रक्रिया संपन्न।



 22 सितंबर

एमओएम ने किया मंगल के गुरूत्वीय क्षेत्र में प्रवेश, 
300 दिन तक निष्क्रिय पड़े रहने के बाद 440 न्यूटन लिक्विड एपोजी मोटर का प्रायोगिक परीक्षण,
यानी उसे चला कर देखा गया , चार सेकण्ड तक चलाया गया और जब वो चल गया तो वैज्ञानिकों ने चैन की साँस ली
अगर कहीं वो फेल हो जाता तो अभियान की सफलता पर प्रश्नचिंह लग सकता था  

अंतिम पथ संशोधन कार्य संपन्न।

 24 सितंबर:
एमओएम मंगल की लक्षित कक्षा में पहुंचा,
दुनिया के ५१ मिशन में से २१ मिशन  ही सफल हुए और उसमे से हम एक हैं
१२ मिनट २८ सेकण्ड बाद यान से संकेत मिलने शुरू हो गए ........


मंगल यान के खच महत्वपूर्ण बिंदु -------
 १-भारत कम लागत में भेजने वाला पहला देश बना दुनिया भर में 
२-४५० करोड़ रुपये की लगत वाला मंगल यान सबसे किफायती और सफल अभियान
३-इसे भेजने के बाद दुनिया में 
यूरोपीय संघ , अमेरिका , रूस के बाद चौथे नंबर पर भारत ,
४-एशिया में नबर एक बना भारत
५-यूरोपीय संघ , अमेरिका , रूस के यान मंगल पर गए अवश्य पर के प्रयास  के बाद
६-मंगल यान लाल ग्रह की सतह और उसके खनिज अवयवों का अध्ययन करेगा 

७-मीथेन गैस की खोज भी करेगा और मीथेन का लक्ष्य ले जाने वाला पहला यान है ये 
७-मीथेन जीवन संबधी मुख्य रसायन है .....
अगर वहां मीथेन मिला तो जानिये जीवन संभव है वहां |

'इसरो' ने जारी की मंगल यान की भेजी पहली तस्वीर-२५ सितम्बर 
२२ सितम्बर २०१४ को भारत के यान का स्वागत करने हेतु नासा का "मावेन मिशन "
पहले ही स्थापित था लेकिन मंगल यान की चकाचोंध में उसकी चमक कहीं खो गयी ........
कम से कम भारत के किसी भी समाचार एजेंसी ने इसकी सुध नहीं ली .........
इसका बजट मंगल यान से दस गुना अधिक है ........
इतिहास में पहली बार दो देशों के मंगल अभियान एक साथ संपन्न हुए
'मावेन' अमेरिका का १५ वां अभियान है नासा के शुरू के छह अभियान विफल हुए 

लेकिन 'मावेन' को मिला कर नौ अभियान सफल हुए
२००३ --यूरोपीय एजेनसी का मार्स एक्सप्रेस ऑर्बिटर
जापान ने भी प्रयास किया पर विफल हुआ
रूस का विफल अभियान फोबोस ग्रन्ट मिशन जो प्रथ्वी की कक्षा से बाहर ही नहीं आया था | 

भारत की प्रतिभायेँ

एक प्रयास ---------
भारत प्रतिभा सम्पन्न देश है भारत की प्रतिभायेँ समय-समय पर चका-चौँध करती रहती हैँ ।
कम लागत मेँ पहली बार की सफलता 'सोने पर सुहागा' जैसी है  
'ऐसी ही एक घटना जनसत्ता मेँ पढ़ी थी ।
अस्सी के दशक की है मथुरा रिफाइनरी मेँ कुछ तकनीकी ख़राबी आ गयी 
तब विदेशी समाधान की खोज की गयी लेकिन समय और होने वाला व्यय बहुत अधिक था 
तब हमारे अपने वैज्ञानिक आगे आये और उन्होने बहुत कम समय और बहुत कम लागत मेँ समस्या सुलझा ली
' आज अचानक ये घटना याद आ गयी। 
ऐसा है मेरा महान भारत और उसकी प्रतिभाएं
भारतीय प्रतिभाओँ की उपलब्धि को मेरा नमन
जय हिन्द जय भारत 

हमारा गर्व --------

एक प्रयास ---------
अब आदत डाल लिजिये सिर्फ़ 'नासा' ही नही 'इसरो' भी ख़ोजिये -
-'इसरो' ने जारी की मंगल यान की भेजी पहली तस्वीर-

लेखक की कलम आज सार्थक

एक प्रयास ---------

चंदा ने अपनी छाती पर तो नही चढ़ने दिया पर 
बचपन मेँ चंपक मेँ पढ़ी बाल कविता के लेखक की कलम आज सार्थक हो गयी 
तिरंगा मंगल पर लहरा भारत का मान बढ़ा रहा है-- 


तारोँ के संग चंदा बैठा, हँस-हँस मुझे चिढ़ाता है ।
रोज़ बुलाता हूँ मैँ उसको, वह अपनी अकड़ दिखाता है। 
एक बड़े राकेट पर चढ़ कर चंद्रलोक को जाऊँगा,
छाती पर चंदा की चढ़ कर मंगल का पता लगाऊँगा ।
खोज करुँगा मंगल तारा ,राष्ट्रधवजा फहराऊँगा ,
ऊँची करके राष्ट्र पताका भारत का मान बढ़ाऊँगा ।-----
आज सालों बाद आ ही गया वो दिन -----------हर भारत वासी ढेरों बधाई 

Saturday, 9 August 2014

क्या आप जानते हैं ..??????

एक प्रयास ---------1951 में पहले एशियन खेलों की मेजबानी करने वाले मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में शाम को तीन बजकर 50 मिनट पर सूर्य की किरणों से इंचियोन एशियन खेलों की मशाल को प्रज्ज्वलित किया गया। ----



63 साल बाद भारत का मेजर ध्यानचंद स्टेडियम फिर ऐतिहासिक क्षण का गवाह बना और यह पहली बार है कि भारत से बाहर होने वाले एशियन खेलों की मशाल यहां प्रज्ज्वलित की गई।
साधारणत: अभी तक मशाल को मेजबान शहर में ही प्रज्ज्वलित किया जाता है।


पहले एशियन खेलों की 61 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक लैंप को भी इस रिले के दौरान प्रदर्शित किया गया।
भारत के बाद यह टॉर्च विहेई, चीन होते हुए 13 अगस्त को इंचियोन पहुंचेगी।

Sunday, 3 August 2014

मित्रता बहुत सुंदर भाव

एक प्रयास ---------मित्र कोई बहुत पास , मित्रता बहुत सुंदर भाव । 
जीवन के कई कदम ,कई राह , कई पड़ाव और कई नही अनेकोँ मित्र ! 
कुछ अच्छे , कुछ सच्चे , कुछ बहुत ही विशेष ! 
बचपन मेँ कुछ मिले और बिछुड़ गये जिनके बस नाम और धुँधली यादोँ मेँ कुट्टा-अब्बा सहित साथ बिताये पल हैँ पास ।
कुछ संजो गये अतीत मे सुनहरी यादेँ जो हैँ आज भी साथ ।
वर्तमान मेँ बहुत सारे मित्र आभासी संसार से लेकर वास्तविकता तक यहीँ हैँ आस-पास  
समय चक्र घूमते हुये अपने अनुसार परिभाषित कर देता है नये कलेवर , नये रंग-रुप मेँ लेकिन मूल भाव तो वही है - 
मित्रता का , दोस्ती का अपनत्व का  
सभी मित्रोँ को शुभकामनायेँ

Thursday, 24 July 2014

खिलाड़ियोँ का किया अपमान,

एक प्रयास ---------'चीन ने उछाली भारतीय पगड़ी'  खिलाड़ियोँ का किया अपमान, 
अभी तक भारतीय ज़मीन पर रेँगने वाला चीन औकात भूल गया 
एक प्रयास ---------थकान और उत्साह के साथ गंतव्य की ओर बढ़ते काँवरियोँ के कदम , बम-बम भोले  
एक प्रयास ---------तेलंगाना की ब्राँड एम्बैसडर 'सानिया' बनी और एक बार फिर विवाद ! 
थोड़ा बड़प्पन दिखायेँ सानिया और नवनिर्मित राज्य की आर्थिक स्थिति देखते हुये एक करोड़ का चैक वापस कर देना चाहिये । मेरे ख़्याल से विरोध के स्वर भी आर्थिक कारणोँ से उठे हैँ , 
शब्द कुछ भी हो विरोध का कारण यही है । 
अमित जी इस निशुल्क सेवा का अच्छा उदाहरण हैँ । 
वैसे सभी चैनल समर्थकोँ के साथ अखाड़े मेँ जमे हैँ 

'गोरोँ की आधीनता आज भी खेलोँ के रुप मेँ' -

एक प्रयास ---------
एक बार फ़िर राष्ट्रमंडल ख़ेल शुरु महारानी ने गर्व से की घोषणा --
 'गोरोँ की आधीनता आज भी खेलोँ के रुप मेँ' ----:( क्योँ नही छोड़ देते सदस्यता भई ! 
अब तो अनुबंध की समय-सीमा भी समाप्त हो गयी  
नई सरकार से अनुरोध है कोई कूटनितिक कदम इस ओर भी उठायेँ ।

Sunday, 20 July 2014

अपने घर जाओ भाई

एक प्रयास ---------
भैया काहे दूसरों के मामले में टांग अड़ा रहे अपने घर जाओ , हमारा मामला हम देख लेँगे....

..."कश्मीर मुद्दा कोई अंतरराष्ट्रीय मुद्दा नहीं है."

जिस बात के लिए पटेल कभी तैयार नहीं थे लेकिन रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठा पाए !!ना कोई सुनने वाला था , ना ही मानने वाला , लाचार थे कुछ नहीं कर पाए ...........
आज सालों बाद मोदी जी ने वही काबिले तारीफ़ कदम उठा लिया ..........

'संयुक्त राष्ट्र के सैन्य मिशन के दफ़्तर को खाली करने को कहा गया है, 
जो दिल्ली में पुराने क़िले के पास एक इमारत में 1949 से भारत में चल रहा है.
संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी ख़ामोशी से दिल्ली के सरकारी बंगले में अपना सामान समेट रहे हैं''
नई सरकार का फ़ैसला है, जो एक सख्त संदेश देना चाहती है कि-
"कश्मीर मुद्दा कोई अंतरराष्ट्रीय मुद्दा नहीं है."

ब्रिक्स में भी जय हिँद

एक प्रयास ------
ब्रिक्स सम्मेलन तो पहले भी हुये पर उसकी ईटेँ भारत मेँ पहले कभी इतनी मुख़रता से नही बोली ! जय हिँद , जय भारत ।
 भारत सहित ब्रिक्स के पांचो प्रमुख विकासशील देशों ने बराबर की हिस्सेदारी के साथ 100 अरब डॉलर की शुरूआती अधिकृत पूंजी के साथ नये विकास बैंक की स्थापना का फैसला किया गया।



बैंक की शुरूआती अधिकृत पूंजी 100 अरब डॉलर होगी। 
शुरूआत में पांचो सदस्य कुल 50 अरब डॉलर की पूंजी का अंशदान करेंगे। 
इसमें संस्थापक सदस्यों की बराबर बराबर हिस्सेदारी होगी।
  
हालांकि, बैंक का मुख्यालय चीन में शंघाई में होगा। 
भारत चाहता है कि यह नयी दिल्ली में हो। 
बैंक का प्रथम अध्यक्ष भारत होगा....................

Sunday, 15 June 2014

मेरे पिता'-सादर नमन

एक प्रयास ---------
नौ पुत्रियों के 'मेरे पिता' बेहद शांत थे , पेशे से तहसीलदार थे !
बेहद ईमानदार और साफ़-सुथरी छवि थी उनकी
हर निर्णय बड़े सोच-समझ कर लेते थे .....किसी की आलोचना बिलकुल पसंद नहीं थी , ना करते थे ना ही सुनना पसंद था .......हम कुछ कहते तो ...'हमें बड़े ही प्यार से समझाते बीबी ऐसे ना कहना चाहिए '
हमेशा समझाते थे जिंदगी की बातें , लड़ने का हौसला देते कहते थे ...
'जिंदगी की समस्या गणित की समस्या की तरह है जैसे उनका हल अवश्य होता है जिंदगी की भी हर समस्या हल हो सकती है ..........जैसे कई बार सवाल गलत हो जाता है हम भी जिंदगी में गलत निर्णय कर लेते हैं ......लेकिन गणित की तरह ही फिर से सही हल निकाल सकते हैं '

उनकी हास्य क्षमता कमाल थी ,हर बात को अपने तरीके से कहते नपे तुले शब्दों में ........

उन्हें गर्व था अपनी नौ पुत्रियों पर .......
आप लोगो ने सुना होगा अक्सर कहानी में कहा जाता है .
...'एक राजा के साथ लड़के या सात बेटी थी' ......
वो बड़े गर्व से कहते में तो राजा  से भी बड़ा हूँ ......'मेरी तो नौ बेटी हैं' .........

पढने के बेहद शौक़ीन थे , खाली वक्त में पुस्तकें उनका साथी थी
घर पर एक पुस्तकालय था .....
जब भी तबादला होता घर के हिसाब से पुस्तकालय अपनी जगह बना ही लेता था ............
हमारे मित्र थे वो ........मम्मी तो किसी भी गलती पर अक्सर डांट देती लेकिन उन्होंने हमें कभी भी नहीं डांटा.....जिस नए शहर में हम जाते घर का सामान लगाते -लगाते ही वो हमें शहर से परिचित कराने निकल पड़ते थे ..........
अक्सर शाम को हम घूमने जाते और शहर की गलियों -सड़कों से हमारी दोस्ती हो जाती .........
एक समय ऐसा आया जब उनकी पोस्टिंग छोटी जगह पर हो गयी और फिर कई माह तक ऐसे ही चला तो तो हमें पढ़ाई के कारण उनसे दूर रहना पडा फिर वो माह में एक बार आते ......
ये सिलसिला उनके सेवा निवृत्त होने तक चला ..............
प्रशस्ति पत्र----


जब भी वो घर आते आते इतनी बातें इकट्ठी कर लाते अपने इलाके की , ग्रामीणों की बातें , अपने अंदाज़ में सुनाते ..बड़ा मजा आता था ..........
नए-नए अनुभव सुनाते ......हमारी बातें पूछते .....और कुछ दिन रुक चले जाते थे ...
हमारा और उनका बड़ा अच्छा ताल -मेल था ......हमेशा हम पर भरोसा दिखाते .....
.कई बार परिवार की दकियानूसी बातें और विचार सामने आते तो  परिवार के खिलाफ जाकर हमारे हित में निर्णय लेते थे ..कई बार ऐसा हुआ .........जब बड़ी बहन के कालेज जाने की बात हुई ..........
कभी किसी काम को मना नहीं किया ........अपने दायरे में रह कर चाहे जो करो ................
बहुत दिया , बहुत किया हमारे लिए !!.........


और ईश्वर ने जब एक झटके से उन्हें हमसे छीना तो लगा जिंदगी रूक गयी ....:(........
लेकिन कहाँ रूकती है जिंदगी ..........???
समय के साथ हम भी आगे बढ़ते गए ...........
उनकी म्रत्यु के कई साल बाद उनकी 'मामी' यानी मेरी दादी हमारे घर आई तो बोली रानी किसका नाम है ?
मैंने कहा मेरा तो बोली सुरेश लल्ला (मेरे पिता जी )कहते थे मुझे रानी बहुत अच्छी लगती है ......में ये बात बहुत अच्छी तरह जानती थी .लेकिन उनके मुह से ये बात सुन कर मेरे आंसू ही नहीं रुके .......:(
बहुत कुछ है दिल में ..........बहुत सी यादें हैं .........उन यादों को यहाँ कैसे समा सकते हैं ...?
..लेकिन उन्हें नमन करते हुए श्रधांजलि देते हुए एक  संस्मरण लिख दिया ......

हम सब आपको कभी नहीं भूल सकते पिताजी .............
आप बहुत -बहुत अच्छे थे पिताजी  .......वैसे तो आप हमेशा हमारे साथ हैं 
लेकिन पितृ दिवस पर हम सब का सादर नमन ..........