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Friday, 26 January 2018
Saturday, 16 December 2017
जब भारतीय मेजर ने ख़ुद अपना पैर काटा-----१९७१ के साहसी जनरल
एक प्रयास ---------
जब भारतीय मेजर ने ख़ुद अपना पैर काटा------------
१९ ७१ युद्ध
जब भारतीय मेजर ने ख़ुद अपना पैर काटा------------
१९ ७१ युद्ध
मेजर कार्डोज़ो ने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण सिलहट की लड़ाई में भाग लिया था.
उनको हेलिकॉप्टर से चारों ओर चल रही गोलियों के बीच युद्धस्थल पर उतारा गया था.
पाकिस्तानी सेना के आत्मसमर्पण के बाद जब वो उस इलाक़े में गश्त लगा रहे थे,
तो उनका पैर एक बारूदी सुरंग पर पड़ा.....
आगे की कहानी ख़ुद बता रहे हैं
उस समय मैं वेलिंगटन स्टॉफ़ कॉलेज में कोर्स कर रहा था. हमें हुक्म मिला कि आप अपने घर-परिवार को छोड़कर सीधे पलटन में पहुँचिए.
जब मैं दिल्ली पहुँचा, तो पता चला कि लड़ाई शुरू हो गई है. पालम पहुँचे, तो पता चला कि विमान कैंसिल हो गए हैं, इसलिए मुझे भागकर नई दिल्ली स्टेशन पहुँचना पड़ा.
यहाँ पहुँचे तो पता चला कि असम मेल निकल गई है. दौड़कर गाड़ी की चेनपुलिंग करके हम ट्रेन में बैठे. असम पहुँचकर हमें पता चला कि सिलहट पर क़ब्ज़े की लड़ाई चल रही है.
हम धर्मनगर पहुँचे और जीप में बैठकर एक जगह खलौरा पहुँचे. वहाँ हम हेलिकॉप्टर के इंतज़ार में थे. हम देख रहे थे कि कई हेलिकॉप्टर में बड़ी संख्या में भारतीय जवान घायल होकर पहुँच रहे थे.
हम हेलिकॉप्टर से जब वहाँ पहुँचें, तो देखा कि भारी गोलाबारी चल रही थी. मोर्टार से, तोपखाने से गोले दाग़े जा रहे थे. वहाँ भयंकर लड़ाई चल रही थी. काफ़ी जवान घायल हो रहे थे और मारे जा रहे थे. साथ ही हम अपने दुश्मन को भी नुक़सान पहुँचा रहे थे.
मैं बारूदी सुरंग में फँस गया और मेरा एक पैर उड़ गया.
मेरे साथी मुझे उठाकर पलटन में ले आए.
मेरे साथी मुझे उठाकर पलटन में ले आए.
मॉरफ़िन और कोई दर्द निवारक दवा नहीं मिली.
मैंने अपने गुरखा साथी से बोला कि खुखरी लाकर पैर काट लो, लेकिन वो इसके लिए तैयार नहीं हुआ.
फिर मैंने खुखरी मांगकर ख़ुद अपना पैर काट लिया.
उस कटे पैर को वहीं गड़वा दिया.
सीओ साहब ने बोला कि पाकिस्तान का एक युद्धबंदी सर्जन है,
मैंने उसे हुक्म दिया है कि वो ऑपरेशन करे.
मैंने कहा कि मैं भारतीय अस्पताल में जाना चाहता हूँ लेकिन पता चला कि कोई हेलिकॉप्टर नहीं है.
फिर मैं तैयार हुआ.
मेजर मोहम्मद बशीर ने मेरा ऑपरेशन किया.
उन्होंने बहुत अच्छा ऑपरेशन किया.
मैं उसे धन्यवाद नहीं दे पाया. बीबीसी के माध्यम से उन्हें मालूम होगा कि मैं उनका आभारी हूँ.
मैं उन्हें धन्यवाद देना चाहता हूँ.
आज अपने नकली पैर के साथ आत्मविश्वास से भरे हैं मेजर जनरल
आज अपने नकली पैर के साथ आत्मविश्वास से भरे हैं मेजर जनरल
Thursday, 17 August 2017
शत -शत नमन
एक प्रयास ---------आज मदन लाल जी की पुन्य तिथि पर एक प्रसंग याद आ गया --
है मेरे व्यक्तिगत जीवन का जो मदन लाल जैसे महान क्रांतिकारी से जुड़ा है .......
17 अगस्त 1909 को विदेशी धरती पर फांसी पर चढ़ाए जाने के बाद भी मदन लाल ढींगरा जी की राज्य व भारत सरकार ने कोई सुध नहीं ली ......
उनके पार्थिव शरीर को भारत में किसी के द्वारा ना मांगे जाने के कारण उनके शरीर को जेल में ही दफना दिया ..............
जहाँ कुछ समय के बाद शहीद उधम सिंह को भी फाँसी के उपरांत दफना दिया गया ...........................
लेकिन ना जाने क्यों और कैसे उनकी शहादत की याद 1976 में सरकार को आ ही गयी तब ब्रिटिश सरकार से बात--चीत के बाद दोनों क्रांतिकारियों के अंतिम अवशेष भारत में लाए गए...........................
उन दिनों हम रूडकी में रहते थे और रूडकी तब उत्तर प्रदेश में था ..........
तब ,आज के बहुचर्चित 'नारायण दत्त तिवारी 'उत्तर प्रदेश के 'मुख्य मंत्री' थे
मदन लाल ढींगरा जी की अस्थियाँ भारत आई और उन्हें विसर्जन के लिए सड़क मार्ग से हरिद्वार ले जाया जा रहा था
मेरे पिताजी हमें ,उस महान आत्मा की विसर्जन हेतु जाती अस्थियों के दर्शन के लिए ले गए थे ...........
...साथ में छोटी बहन Garima Saxena भी थी
...साथ में छोटी बहन Garima Saxena भी थी
अस्थि कलश खुली जीप या ट्रक में रखे थे
और अघोषित कर्फ्यू जैसा वातावरण था ............
एक दम शान्ति ........
एक दम शान्ति ........
हज़ारों की संख्या में लोग सड़क के दोनों और जमा थे ...
अपने महान क्रांतिकारी को माल्यार्पण कर श्रधांजलि दे रहे थे ..........
तब इस बात के गौरव को ,इसके महत्व को समझ नहीं सकी थी .. लेकिन आज वो याद ताज़ा हो गयी ....और अब में उस एतिहासिक लम्हे का साक्षी बनने के लिए बहुत ही गर्व अनुभव करती हूँ ..............
मुझे अवसर मिला उस महान व्यक्ति की अस्थियों को प्रणाम करने का .......
उस वीर को शत-शत नमन ,करबद्ध प्रणाम ....जय हिंद,
उस वीर को शत-शत नमन ,करबद्ध प्रणाम ....जय हिंद,
वन्दे मातरम .........
Sunday, 25 December 2016
छत्रपति शिवाजी
एक प्रयास ---------मुंबई के पास अरब सागर में 3600 करोड़ की लागत से बनने वाले छत्रपति शिवाजी महाराज के भव्य स्मारक की नींव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रखी .
मुंबई में गिरगांव चौपाटी के नजदीक समुद्र में तट से करीब डेढ़ किलोमीटर अंदर छत्रपति शिवाजी महाराज के स्मारक का निर्माण होनेवाला है.
स्मारक की आधारशीला रखने के दौरान पीएम मोदी ने जल पूजन भी किया इस खास पूजन समारोह के लिए राज्य के कोने-कोने से मिट्टी और नदियों का जल कलश में भरकर लोग शोभायात्रा निकालते हुए मुंबई पहुंचे
समारोह की जगह पर छत्रपति शिवाजी के दरबार और सिंहासन की तरह एक विशेष मंच बनाया . जाने-माने आर्ट डायरेक्टर नितिन देसाई की देखरेख इसे बनाया गया . समारोह को लेकर पूरे मुंबई शहर में उत्सव जैसा माहौल बन गया छत्रपति शिवाजी महाराज का यह विशाल स्मारक दुनिया का सबसे बड़ा स्मारक होगा. शिवाजी की मूर्ति अमेरिका के स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी से भी बड़ी होगी. 192 मीटर ऊंचे इस स्मारक के लिए बनने वाला आधार 77 मीटर होगा. इसी आधार पर घोड़े पर सवार छत्रपति शिवाजी की मूर्ति 114 मीटर की होगी. पूरे स्मारक को 13 हेक्टेयर में फैले चट्टानों पर बनाया जाने वाला है. इस स्मारक स्थल पर एमपी थिएटर, लाइब्रेरी, फूड कोर्ट भी बनाया जाएगा.
मुंबई में गिरगांव चौपाटी के नजदीक समुद्र में तट से करीब डेढ़ किलोमीटर अंदर छत्रपति शिवाजी महाराज के स्मारक का निर्माण होनेवाला है.
स्मारक की आधारशीला रखने के दौरान पीएम मोदी ने जल पूजन भी किया इस खास पूजन समारोह के लिए राज्य के कोने-कोने से मिट्टी और नदियों का जल कलश में भरकर लोग शोभायात्रा निकालते हुए मुंबई पहुंचे
समारोह की जगह पर छत्रपति शिवाजी के दरबार और सिंहासन की तरह एक विशेष मंच बनाया . जाने-माने आर्ट डायरेक्टर नितिन देसाई की देखरेख इसे बनाया गया . समारोह को लेकर पूरे मुंबई शहर में उत्सव जैसा माहौल बन गया छत्रपति शिवाजी महाराज का यह विशाल स्मारक दुनिया का सबसे बड़ा स्मारक होगा. शिवाजी की मूर्ति अमेरिका के स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी से भी बड़ी होगी. 192 मीटर ऊंचे इस स्मारक के लिए बनने वाला आधार 77 मीटर होगा. इसी आधार पर घोड़े पर सवार छत्रपति शिवाजी की मूर्ति 114 मीटर की होगी. पूरे स्मारक को 13 हेक्टेयर में फैले चट्टानों पर बनाया जाने वाला है. इस स्मारक स्थल पर एमपी थिएटर, लाइब्रेरी, फूड कोर्ट भी बनाया जाएगा.
Monday, 12 September 2016
Tuesday, 16 August 2016
अच्छे दिन की परिभाषा
एक प्रयास ---------अच्छे दिन की सबकी परिभाषा हो सकती है मेरे लिए
सबसे अच्छा रहा शपथ ग्रहण के बाद मोदीजी का गंगा आरती में शामिल होना ,जेएनयू के गद्दारों का खुलासा ,कश्मीर में सेना को आत्म रक्षा हेतु मिले अधिकार ,कई स्कूलों में होने वाले राष्ट्रगान के अपमान का खुलासा , वीर सावरकर को राष्ट्र का पहली बार नमन , लाल किले का केसरिया होना और सबसे बड़ी बात देश भक्ति का नकाब ओढ़े सलमान खुर्शीद के मन की बात का सामने आना | मेरे अच्छे दिन तो ऐसी ही घटनाओ से परिभाषित होते हैं :)
आपके ??
सबसे अच्छा रहा शपथ ग्रहण के बाद मोदीजी का गंगा आरती में शामिल होना ,जेएनयू के गद्दारों का खुलासा ,कश्मीर में सेना को आत्म रक्षा हेतु मिले अधिकार ,कई स्कूलों में होने वाले राष्ट्रगान के अपमान का खुलासा , वीर सावरकर को राष्ट्र का पहली बार नमन , लाल किले का केसरिया होना और सबसे बड़ी बात देश भक्ति का नकाब ओढ़े सलमान खुर्शीद के मन की बात का सामने आना | मेरे अच्छे दिन तो ऐसी ही घटनाओ से परिभाषित होते हैं :)
आपके ??
रोमांचक संस्मरण
एक प्रयास ---------
14 और 15 के दो दिन यात्रा में बीते ! बेहद रोमांचक और उत्साही रही जाते वक्त कुछ सड़क समस्या रही रामपुर से रुद्रपुर तक बेहद खराब सड़क लेकिन लौटते वक्त वो मलाल भी मिट गया I
गढ़ के बाद से ही कांवरियों की भीड़ नजर आयी जो रामपुर तक हमारे साथ रही यानी माहौल शिवमय हो चला था
14 और 15 के दो दिन यात्रा में बीते ! बेहद रोमांचक और उत्साही रही जाते वक्त कुछ सड़क समस्या रही रामपुर से रुद्रपुर तक बेहद खराब सड़क लेकिन लौटते वक्त वो मलाल भी मिट गया I
गढ़ के बाद से ही कांवरियों की भीड़ नजर आयी जो रामपुर तक हमारे साथ रही यानी माहौल शिवमय हो चला था
पूरे रास्ते मिली गाड़ियों पर तिरंगे लहर-लहर कर भारतीय होने की गौरवमयी अनुभूति करा रहे थे हमने भी तिरगे की छत्र-छाया में यात्रा की :-D

हमे अवसर मिला देवभूमि उत्तराखण्ड जाने का गन्तव्य था 'कैंची धाम बाबा नीब करौली का आश्रम' !!
जो अनुभव रहा वो ये कि
पहाड़ों पर पर्यावरण , ईमानदारी और भोलापन सभी में अभी शुद्धता है बदलाव की बयार तो सब जगह चल पड़ी है लेकिन वो अभी प्रकृति के निकट है तो कुछ है जो अलग है :)
बेहद बारिश थी 14 को तो बहुत ही तेज़ इसके बीच पहाड़ी रास्ते पर अर्पित की ड्राइविंग रोमांच से भरी रही |
पहाड़ों पर पर्यावरण , ईमानदारी और भोलापन सभी में अभी शुद्धता है बदलाव की बयार तो सब जगह चल पड़ी है लेकिन वो अभी प्रकृति के निकट है तो कुछ है जो अलग है :)
बेहद बारिश थी 14 को तो बहुत ही तेज़ इसके बीच पहाड़ी रास्ते पर अर्पित की ड्राइविंग रोमांच से भरी रही |
15 को भुवाली की ठण्डी सुबह 'वन्दे मातरम् और भारत माता का जयघोष' सुनाई दिया दिखा कुछ नही
शायद स्कूली बच्चे थे प्रभात फेरी हो सकती है मैंने अनुमान लगाया |
हमने टीवी पर झंडा फहराया थोडा मोदीजी को सुना लेकिन समयाभाव के कारण पूरा नही सुन पाये आज समाचार पत्र से पता लगाने का प्रयास रहेगा क्या कहा हमारे प्र मंत्री ने ?
कैंची धाम गए बेहद शान्त, साफ़-सुथरा इलाका बहुत अच्छा लगा ,
उसके बाद नैनीताल की देहरी भी छूई पर बारिश इतनी तेज़ थी कि गाइड के बताने के बाद भी घाटियों और चोटियों पर सिर्फ धुंध ही नज़र आई लेकिन दो दिन बड़े ही अच्छे और तनाव मुक्त बीते,
वापसी में कुछ झरने वेग से बहते दिखे पारदर्शी जल के साथ |शिवानीजी की रचना में 'कालाढूंगी' के खतरनाक जंगलो को पढ़ा था आज उसी जंगल के बीच बहुत बढ़िया घुमावदार रास्ते से वापसी हुई ,
अर्पित का इस तरह पहाड़ पर गाड़ी चलाने का पहला अवसऱ था , में थोड़ी आशंकित थी लेकिन झमाझम बारिश के बीच बहुत रोमांचित और संयत था वो ,
रास्ता घुमावदार है पर सड़क अच्छी बनी है ,जगह-जगह चेतावनी बोर्ड भी हैं ,कुल मिला कर यात्रा रोमांचक और मज़ेदार रही और बाबा नीब करौली का आर्शीवाद भी मिला :-D:-D
शिवानीजी ने एक जगह लिखा है कि पहाड़ का कोई आईएएस भी हो या पीसीएस पहाड़ छोड़ते समय वहाँ की प्रसिद्द 'बाल मिठाई' लेना नही भूलता ,हम तो इन दोनों में से किसी भी श्रेणी में नही और न वहां के मूल निवासी लेकिन अपनी भारतीय देवभूमि के प्रसाद स्वरूप हम भी स्वादिष्ट 'बाल मिठाई' लाना नही भूले :-D:-D
जय बाबा नीब करौली
जय बाबा नीब करौली
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