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Monday, 12 September 2016
Tuesday, 16 August 2016
अच्छे दिन की परिभाषा
एक प्रयास ---------अच्छे दिन की सबकी परिभाषा हो सकती है मेरे लिए
सबसे अच्छा रहा शपथ ग्रहण के बाद मोदीजी का गंगा आरती में शामिल होना ,जेएनयू के गद्दारों का खुलासा ,कश्मीर में सेना को आत्म रक्षा हेतु मिले अधिकार ,कई स्कूलों में होने वाले राष्ट्रगान के अपमान का खुलासा , वीर सावरकर को राष्ट्र का पहली बार नमन , लाल किले का केसरिया होना और सबसे बड़ी बात देश भक्ति का नकाब ओढ़े सलमान खुर्शीद के मन की बात का सामने आना | मेरे अच्छे दिन तो ऐसी ही घटनाओ से परिभाषित होते हैं :)
आपके ??
सबसे अच्छा रहा शपथ ग्रहण के बाद मोदीजी का गंगा आरती में शामिल होना ,जेएनयू के गद्दारों का खुलासा ,कश्मीर में सेना को आत्म रक्षा हेतु मिले अधिकार ,कई स्कूलों में होने वाले राष्ट्रगान के अपमान का खुलासा , वीर सावरकर को राष्ट्र का पहली बार नमन , लाल किले का केसरिया होना और सबसे बड़ी बात देश भक्ति का नकाब ओढ़े सलमान खुर्शीद के मन की बात का सामने आना | मेरे अच्छे दिन तो ऐसी ही घटनाओ से परिभाषित होते हैं :)
आपके ??
रोमांचक संस्मरण
एक प्रयास ---------
14 और 15 के दो दिन यात्रा में बीते ! बेहद रोमांचक और उत्साही रही जाते वक्त कुछ सड़क समस्या रही रामपुर से रुद्रपुर तक बेहद खराब सड़क लेकिन लौटते वक्त वो मलाल भी मिट गया I
गढ़ के बाद से ही कांवरियों की भीड़ नजर आयी जो रामपुर तक हमारे साथ रही यानी माहौल शिवमय हो चला था
14 और 15 के दो दिन यात्रा में बीते ! बेहद रोमांचक और उत्साही रही जाते वक्त कुछ सड़क समस्या रही रामपुर से रुद्रपुर तक बेहद खराब सड़क लेकिन लौटते वक्त वो मलाल भी मिट गया I
गढ़ के बाद से ही कांवरियों की भीड़ नजर आयी जो रामपुर तक हमारे साथ रही यानी माहौल शिवमय हो चला था
पूरे रास्ते मिली गाड़ियों पर तिरंगे लहर-लहर कर भारतीय होने की गौरवमयी अनुभूति करा रहे थे हमने भी तिरगे की छत्र-छाया में यात्रा की :-D

हमे अवसर मिला देवभूमि उत्तराखण्ड जाने का गन्तव्य था 'कैंची धाम बाबा नीब करौली का आश्रम' !!
जो अनुभव रहा वो ये कि
पहाड़ों पर पर्यावरण , ईमानदारी और भोलापन सभी में अभी शुद्धता है बदलाव की बयार तो सब जगह चल पड़ी है लेकिन वो अभी प्रकृति के निकट है तो कुछ है जो अलग है :)
बेहद बारिश थी 14 को तो बहुत ही तेज़ इसके बीच पहाड़ी रास्ते पर अर्पित की ड्राइविंग रोमांच से भरी रही |
पहाड़ों पर पर्यावरण , ईमानदारी और भोलापन सभी में अभी शुद्धता है बदलाव की बयार तो सब जगह चल पड़ी है लेकिन वो अभी प्रकृति के निकट है तो कुछ है जो अलग है :)
बेहद बारिश थी 14 को तो बहुत ही तेज़ इसके बीच पहाड़ी रास्ते पर अर्पित की ड्राइविंग रोमांच से भरी रही |
15 को भुवाली की ठण्डी सुबह 'वन्दे मातरम् और भारत माता का जयघोष' सुनाई दिया दिखा कुछ नही
शायद स्कूली बच्चे थे प्रभात फेरी हो सकती है मैंने अनुमान लगाया |
हमने टीवी पर झंडा फहराया थोडा मोदीजी को सुना लेकिन समयाभाव के कारण पूरा नही सुन पाये आज समाचार पत्र से पता लगाने का प्रयास रहेगा क्या कहा हमारे प्र मंत्री ने ?
कैंची धाम गए बेहद शान्त, साफ़-सुथरा इलाका बहुत अच्छा लगा ,
उसके बाद नैनीताल की देहरी भी छूई पर बारिश इतनी तेज़ थी कि गाइड के बताने के बाद भी घाटियों और चोटियों पर सिर्फ धुंध ही नज़र आई लेकिन दो दिन बड़े ही अच्छे और तनाव मुक्त बीते,
वापसी में कुछ झरने वेग से बहते दिखे पारदर्शी जल के साथ |शिवानीजी की रचना में 'कालाढूंगी' के खतरनाक जंगलो को पढ़ा था आज उसी जंगल के बीच बहुत बढ़िया घुमावदार रास्ते से वापसी हुई ,
अर्पित का इस तरह पहाड़ पर गाड़ी चलाने का पहला अवसऱ था , में थोड़ी आशंकित थी लेकिन झमाझम बारिश के बीच बहुत रोमांचित और संयत था वो ,
रास्ता घुमावदार है पर सड़क अच्छी बनी है ,जगह-जगह चेतावनी बोर्ड भी हैं ,कुल मिला कर यात्रा रोमांचक और मज़ेदार रही और बाबा नीब करौली का आर्शीवाद भी मिला :-D:-D
शिवानीजी ने एक जगह लिखा है कि पहाड़ का कोई आईएएस भी हो या पीसीएस पहाड़ छोड़ते समय वहाँ की प्रसिद्द 'बाल मिठाई' लेना नही भूलता ,हम तो इन दोनों में से किसी भी श्रेणी में नही और न वहां के मूल निवासी लेकिन अपनी भारतीय देवभूमि के प्रसाद स्वरूप हम भी स्वादिष्ट 'बाल मिठाई' लाना नही भूले :-D:-D
जय बाबा नीब करौली
जय बाबा नीब करौली
Monday, 23 May 2016
गौरव के पल
एक प्रयास --------भारत को अंतरिक्ष में एक और बड़ी कामयाबी, पहला मेड इन इंडिया स्पेस शटल की सफल लॉन्चिंग
बेंगलुरू : भारत ने आज स्वदेशी आरएलवी यानी पुन: प्रयोग किए जा सकने वाले प्रक्षेपण यान के पहले प्रौद्योगिकी प्रदर्शन का आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा से सफल प्रक्षेपण कर लिया है। आरएलवी पृथ्वी के चारों ओर कक्षा में उपग्रहों को प्रक्षेपित करने और फिर वापस वायुमंडल में प्रवेश करने में सक्षम है
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रवक्ता ने आरएलवी-टीडी एचईएक्स-1 के सुबह सात बजे उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद कहा, ‘अभियान सफलतापूर्वक पूरा किया गया।’ यह पहली बार है, जब इसरो ने पंखों से युक्त किसी यान का प्रक्षेपण किया है। यह यान बंगाल की खाड़ी में तट से लगभग 500 किलोमीटर की दूरी पर उतरा। हाइपरसोनिक उड़ान प्रयोग कहलाने वाले इस प्रयोग में उड़ान से लेकर वापस पानी में उतरने तक में लगभग 10 मिनट का समय लगा। आरएलवी-टीडी पुन: प्रयोग किए जा सकने वाले प्रक्षेपण यान का छोटा प्रारूप है।
आरएलवी को भारत का अपना अंतरिक्ष यान कहा जा रहा है। इसरो के वैज्ञानिकों के अनुसार, यह लागत कम करने, विश्वसनीयता कायम रखने और मांग के अनुरूप अंतरिक्षीय पहुंच बनाने के लिए एक साझा हल है। इसरो ने कहा कि आरएलवी-टीडी प्रौद्योगिकी प्रदर्शन अभियानों की एक श्रृंखला है, जिन्हें एक समग्र पुन: प्रयोग योग्य यान ‘टू स्टेज टू ऑर्बिट’ (टीएसटीओ) को जारी करने की दिशा में पहला कदम माना जाता रहा है।
भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी के अनुसार, इसे एक ऐसा उड़ान परीक्षण मंच माना जा रहा है, जिस पर हाइपरसोनिक उड़ान, स्वत: उतरने और पावर्ड क्रूज फ्लाइट जैसी विभिन्न अहम प्रौद्योगिकियों का आकलन किया जा सकता है। ‘विमान’ जैसा दिखने वाला 6.5 मीटर लंबा यह यान एक विशेष रॉकेट बूस्टर की मदद से वायुमंडल में भेजा गया। इस यान का वजन 1.75 टन था। आरएलवी-टीडी को पुन: प्रयोग किए जा सकने वाले रॉकेट के विकास की दिशा में एक ‘बेहद शुरूआती कदम’ माना जा रहा है। इसके अंतिम प्रारूप के विकास में 10 से 15 साल लग सकते हैं
बेंगलुरू : भारत ने आज स्वदेशी आरएलवी यानी पुन: प्रयोग किए जा सकने वाले प्रक्षेपण यान के पहले प्रौद्योगिकी प्रदर्शन का आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा से सफल प्रक्षेपण कर लिया है। आरएलवी पृथ्वी के चारों ओर कक्षा में उपग्रहों को प्रक्षेपित करने और फिर वापस वायुमंडल में प्रवेश करने में सक्षम है
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रवक्ता ने आरएलवी-टीडी एचईएक्स-1 के सुबह सात बजे उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद कहा, ‘अभियान सफलतापूर्वक पूरा किया गया।’ यह पहली बार है, जब इसरो ने पंखों से युक्त किसी यान का प्रक्षेपण किया है। यह यान बंगाल की खाड़ी में तट से लगभग 500 किलोमीटर की दूरी पर उतरा। हाइपरसोनिक उड़ान प्रयोग कहलाने वाले इस प्रयोग में उड़ान से लेकर वापस पानी में उतरने तक में लगभग 10 मिनट का समय लगा। आरएलवी-टीडी पुन: प्रयोग किए जा सकने वाले प्रक्षेपण यान का छोटा प्रारूप है।
आरएलवी को भारत का अपना अंतरिक्ष यान कहा जा रहा है। इसरो के वैज्ञानिकों के अनुसार, यह लागत कम करने, विश्वसनीयता कायम रखने और मांग के अनुरूप अंतरिक्षीय पहुंच बनाने के लिए एक साझा हल है। इसरो ने कहा कि आरएलवी-टीडी प्रौद्योगिकी प्रदर्शन अभियानों की एक श्रृंखला है, जिन्हें एक समग्र पुन: प्रयोग योग्य यान ‘टू स्टेज टू ऑर्बिट’ (टीएसटीओ) को जारी करने की दिशा में पहला कदम माना जाता रहा है।
भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी के अनुसार, इसे एक ऐसा उड़ान परीक्षण मंच माना जा रहा है, जिस पर हाइपरसोनिक उड़ान, स्वत: उतरने और पावर्ड क्रूज फ्लाइट जैसी विभिन्न अहम प्रौद्योगिकियों का आकलन किया जा सकता है। ‘विमान’ जैसा दिखने वाला 6.5 मीटर लंबा यह यान एक विशेष रॉकेट बूस्टर की मदद से वायुमंडल में भेजा गया। इस यान का वजन 1.75 टन था। आरएलवी-टीडी को पुन: प्रयोग किए जा सकने वाले रॉकेट के विकास की दिशा में एक ‘बेहद शुरूआती कदम’ माना जा रहा है। इसके अंतिम प्रारूप के विकास में 10 से 15 साल लग सकते हैं
Saturday, 23 January 2016
एक प्रयास --------नेताजी की जयंती पर विश्व का सबसे बड़ा और सबसे ऊँचा तिरंगा उनको श्रद्धांजलि दी गयी, पहाड़ी मन्दिर परिसर में यह ध्वज दिन-रात फहरेगा|
रक्षा मंत्री ने 10.36 पर बटन दबाया तो गगन चुम्बी तिरंगा आसमान में लहराने लगा |लिखते समय भी मैं भावुक हो रही हूँ
बेहद भावुक कर देने वाला गौरवशाली पल |जय हिन्द जय हिन्द जय हिन्द
रक्षा मंत्री ने 10.36 पर बटन दबाया तो गगन चुम्बी तिरंगा आसमान में लहराने लगा |लिखते समय भी मैं भावुक हो रही हूँ
बेहद भावुक कर देने वाला गौरवशाली पल |जय हिन्द जय हिन्द जय हिन्द
Saturday, 16 January 2016
एक प्रयास ---------
ज़िन्दगी क्या है तू ??
दर्द और संघर्ष से रिश्ता बचपन से रहा था
उसे पता तो था कि ज़िन्दगी के कई आयाम खिली धूप की सुनहरी चमक से हैं लेकिन उस धूप की किरणे उसकी ज़िन्दगी को चमकाने में असमर्थ रही हैं अब तक
उसकी ज़िन्दगी तो आज तक संघर्ष का पर्याय रही है
ज़िन्दगी के कई आयाम से उसके आँगन का कोई परिचय नही रहा कभी |अपने यहां लोगो को हमेशा दुःख में शामिल होते देखा
जब किसी की हंसी-ख़ुशी , नाच-गाने में शामिल हुई तो सवाल किया ज़िन्दगी क्या है तू ??
किसी के लिए धूप-छाँव तो किसी के लिए कड़ी धूप ?
किसी के लिए सुनहरी किरणें तो किसी के लिए अमावस्या की काली रात |लेकिन वो निराश नही आशावान है
उसे प्रतीक्षा है उस सुनहरी नन्ही किरण का जो उसके लिए भी ज़िन्दगी का नया सवेरा लाएगी ई
उसके छोटे से आँगन में भी सुनहरी चमक आएगी
उसका संघर्ष रंग लाएगा उसके जीवन को महकायेगा
ज़िन्दगी क्या है तू ??
दर्द और संघर्ष से रिश्ता बचपन से रहा था
उसे पता तो था कि ज़िन्दगी के कई आयाम खिली धूप की सुनहरी चमक से हैं लेकिन उस धूप की किरणे उसकी ज़िन्दगी को चमकाने में असमर्थ रही हैं अब तक
उसकी ज़िन्दगी तो आज तक संघर्ष का पर्याय रही है
ज़िन्दगी के कई आयाम से उसके आँगन का कोई परिचय नही रहा कभी |अपने यहां लोगो को हमेशा दुःख में शामिल होते देखा
जब किसी की हंसी-ख़ुशी , नाच-गाने में शामिल हुई तो सवाल किया ज़िन्दगी क्या है तू ??
किसी के लिए धूप-छाँव तो किसी के लिए कड़ी धूप ?
किसी के लिए सुनहरी किरणें तो किसी के लिए अमावस्या की काली रात |लेकिन वो निराश नही आशावान है
उसे प्रतीक्षा है उस सुनहरी नन्ही किरण का जो उसके लिए भी ज़िन्दगी का नया सवेरा लाएगी ई
उसके छोटे से आँगन में भी सुनहरी चमक आएगी
उसका संघर्ष रंग लाएगा उसके जीवन को महकायेगा
ठण्ड भी नन्हा बचचा
एक प्रयास ---------ठण्ड भी नन्हे बच्चे जैसी !!
जब तक स्कूल बन्द रहे ठण्ड भी छुट्टी पर रही और खिली धूप का मज़ा लेती रही
जैसे ही स्कूल खुला प्रतीक्षित ठण्ड भी हाज़िर बैग और बच्चों को कपड़े से लदे-फदे देखने के लिए
चेहरे तो किसानो के भी खिले
चलिए इससे पहले ये विदा ले मिलकर लुत्फ़ उठाते हैं
जय हो शुभ हो
जब तक स्कूल बन्द रहे ठण्ड भी छुट्टी पर रही और खिली धूप का मज़ा लेती रही
जैसे ही स्कूल खुला प्रतीक्षित ठण्ड भी हाज़िर बैग और बच्चों को कपड़े से लदे-फदे देखने के लिए
चेहरे तो किसानो के भी खिले
चलिए इससे पहले ये विदा ले मिलकर लुत्फ़ उठाते हैं
जय हो शुभ हो
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