Monday, 10 June 2013

ऐसा क्यों भई ?

एक प्रयास ---------

आडवाणी जी की बात करें तो 
 उनका सपना रहा देश पर राज करना जो समय ने पूरा नही होने दियालेकिन लालसा बनी रही कुर्सी की जो आज भी बरकरार है 
लेकिन अब समय आडवाणी जी के भी
 सोचने का नही है क्या  ......
क्यों इतनी जिद ??? 
अपने बोये पेड़ के फल सबको खाने को नही मिलते ये तो वो अच्छी तरह जानते हैं ......... 
इस उम्र में बच्चा बन जाना सुना था आज उन्होंने  सार्थक कर दिया 
और ये पहली बार नही है ...
बाजपेयी के समय भी इनका यही रवैया था हाँ और फर्क ये है 
कि अटलजी के सामने चली नहीं...तब भी उपप्रधान मंत्री बन कर माने थे 
समय -समय पर सबको सत्ता छोडनी ही पड़ती है , परिवर्तन समय की मांग है सब जानते हैं 
..............थोड़ा बडप्पन दिखाना चाहिए उन्हें 
...............बड़े भी अपना सम्मान बनाए रहे यही उचित है  .......
उनके विरोध में कोइ नही है .........और ये मान गए तो सब मान जायेंगे ये भी पक्का है .
सम्मान उनका सभी करते हैं और कर रहे हैं ..........
लेकिन वो स्वयं ही मौक़ा दे रहे हैं हंसी उड़ाने का ................... स्वयं तो उपहास का पात्र बने खड़े ही हैं पार्टी की छवि भी धूमिल कर रहे हैं  हैं ...........
मुझे उनका ये कदम गलत लगता है ......
सबके सामने ठीकरा उनकी जिद ने फोड़ा वरना अन्दर भी बात हो सकती थी.....
नाराज़ रहते .....जो चाहे कहते लेकिन सबको मौक़ा तो ना देते ............और अब तो भगवान् ही मालिक है ...............वन्दे मातरम 

12 comments:

  1. समय के हिसाब से आदमी को अपनी इज्जत खुद ही बचा लेनी चाहिये, ऐसा ही घरों में भी होता है जहां समझदार बुजुर्ग अपनी मर्जी से छोटों को मौका देकर अपना मान सम्मान बनाये रखते हैं, बिल्कुल सही कहा आपने.

    रामराम.

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    1. परिवर्तन समय की मांग है और ज़रूरी नहीसबको पसंद आये लेकिन समय के साथ तो चलना ही होगा .........
      राम-राम ताऊ

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार (11-06-2013) के "चलता जब मैं थक जाता हुँ" (चर्चा मंच-अंकः1272) पर भी होगी!
    सादर...!
    शायद बहन राजेश कुमारी जी व्यस्त होंगी इसलिए मंगलवार की चर्चा मैंने ही लगाई है।
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. सादर आभार शास्त्री जी

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  3. लालसाओं और महत्वाकांक्षाओं का नतीजा है ये.....

    अनु

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    1. बिलकुल सही कहा आपने और लालच हमेशा बुरा ही होता है

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  4. दुआ चंदन
    बस रहे पावन
    जहाँ भी रहे !

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  5. समय परिवर्तनशील है ,परिवर्तन को स्वीकार करना ही बुद्दिमानी है.
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    1. जी कालीपद जी ......

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  6. kab tak badappan deekhayen bechare :)

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    1. बड़प्पन तो बड़े दिखाएँगे जी

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