Thursday, 20 June 2013

अब कौन कहेगा ! तार आया है... अलविदा तार


एक प्रयास ---------
  • भारत में टेलीग्राम सेवा की शुरुआत 160 साल पहले हुई थी. 
    लेकिन अब उसे बंद करने का फैसला किया गया है. 
    माना जा रहा है कि अब इस सेवा की उपयोगिता बहुत ही सीमित रह गई है. 
    खासकर भारत में टेलीफोन सेवाओं के विस्तार, 
    मोबाइल टेक्नॉलॉजी और एसएमएस जैसी सेवाओं ने टेलीग्राम की जरूरत को कम कर दिया है.
  • सरकार ने तय किया है कि भारत में 15 जुलाई से टेलीग्राम सेवा बंद कर दी जाएगी. 
    फिलहाल भारत में 75 ऐसे केंद्र हैं 
    जहाँ टेलीग्राम सेवा की सुविधा उपलब्ध है और
     तकरीबन एक हजार कर्मचारी इसमें काम कर रहे हैं. 
    हालांकि इसकी हालत खस्ताहाल ही है.
  • अधिकारियों का कहना है कि भारत में तकरीबन पाँच हजार टेलीग्राम रोज भेजे जाते हैं. 
    इस सेवा का इस्तेमाल ज्यादातर सरकारी महकमे ही करते हैं. 
    और अधिकारियों के मुताबिक किसी की मृत्यु हो जाने के मामले में 
    उसके सगे संबंधियों को सूचित करने के लिए तार का इस्तेमाल ज्यादातर किया जाता है.
  • 90 के दशक के मध्य तक पत्रकार लोग टेलीग्राम से खबरे भेजा करते थे. 
    एक अखबार के संपादक ने याद दिलाया कि उनकी कोई खबर 22 पन्नों में सिमटी थी 
    और उसे तार से भेजा गया था. डेस्क पर काम करने वाले संपादकीय 
    कर्मचारियों को उसे पढ़ने लायक बनाने में खासी मशक्कत करनी पड़ी थी.
  • साल 2011 में सरकार ने 60 सालों में पहली बार टेलीग्राम शुल्क में इजाफा किया था. 
    अभी किसी ग्राहक को इस सेवा से 50 शब्द भेजने के लिए 27रुपए खर्च करने पड़ेंगे.
  • हालांकि इस सेवा में भी तकनीकी बदलाव किए गए.
     ऑपरेटर भेजे जाने वाले संदेश को कंप्यूटर में फीड कर के आगे भेजता है 
    और उन संदेशों को स्थानीय डाकघर और डाकिए के माध्यम से मंजिल तक पहुँचाया जाता है.
  • एक टेलीग्राम स्टाफ तार के संदेशों की प्रिट आउट को देखता हुआ.
  • भारत में टेलीग्राम सेवाओं की शुरुआत 1854 में हुई थी. 
    उसके चार साल बाद टेलीग्राम लाइन तत्कालीन कलकत्ता शहर 
    और उपनगरीय इलाके डायमंड हार्बर के बीच स्थापित किया गया था.
  • सरकारी अधिकारियों की योजना है कि टेलीग्राम सेवा को 
    आधिकारिक विदाई दी जाएगी और 
    सबसे आखिरी टेलीग्राम को म्यूज़ियम के लिए सुरक्षित रखा जाएगा.

4 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल शुक्रवार (21-06-2013) के "उसकी बात वह ही जाने" (शुक्रवारीय चर्चा मंचःअंक-1282) पर भी होगी!
    --
    रविकर जी अभी व्यस्त हैं, इसलिए शुक्रवार की चर्चा मैंने ही लगाई है।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. तार का उस जमाने अपना एक अति महत्वपूर्ण स्थान था अब तकनीक के आगे तार भी हार गया. आपने बहुत ही विस्तृत जानकारी दी, शुभकामनाएं.

    रामराम.

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    1. बहुत सही कहा ताऊ
      समय -समय की बात है

      राम -राम

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